डॉ. मनोज गोरकेला को HRPC एलेनोर रूजवेल्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया
Awardह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल (HRPC) के अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन 2025 में सुप्रीम कोर्ट के माननीय अधिवक्ता डॉ. मनोज गोरकेला को HRPC एलेनोर रूजवेल्ट राष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार 2025 प्रदान किया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत के उस उत्कृष्ट मानवाधिकार कार्यकर्ता को दिया जाता है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो और विश्व भर में लोगों के अधिकारों की मान्यता एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो।
एक ऐसा व्यक्तित्व जो हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच बसे भारत-तिब्बत-चीन-नेपाल सीमा के दुर्गम आदिवासी इलाके से उठा और देश के सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा। जहाँ साल के छह महीने भारी बर्फबारी के कारण स्कूल जाना भी असंभव था, वहाँ से निकलकर डॉ. मनोज गोरकेला ने न सिर्फ़ पढ़ाई की, बल्कि अपने क्षेत्र से पहले पीढ़ी के वकील और पहले डिप्टी एडवोकेट जनरल बनकर इतिहास रचा। आज वे भारत सरकार के अधिवक्ता – सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ सरकार के स्पेशल काउंसिल, पूर्व में चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश के स्टैंडिंग काउंसिल तथा उत्तराखंड राज्य के पूर्व डिप्टी एडवोकेट जनरल – सुप्रीम कोर्ट में हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से LLB और कर्नाटक के धारवाड़ विश्वविद्यालय से मानद LLD (डॉक्टर ऑफ लॉ) प्राप्त करने वाले डॉ. गोर्केला ने 2017 में मध्यप्रदेश सरकार को लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए नई सेवा नियमावली तैयार करने का दायित्व निभाया।
अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत का गौरव संयुक्त राष्ट्र (जिनेवा), कोलंबिया यूनिवर्सिटी, वॉशिंगटन डीसी यूनिवर्सिटी, कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ़ द फ्रेजर वैली और ब्रिटिश संसद में गेस्ट लेक्चरर के रूप में आमंत्रित होने वाले डॉ. गोर्केला ने जापान, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का दौरा किया। उन्होंने ऐतिहासिक मुकदमे जैसे भारत के पहले बिटकॉइन केस में सरकार की ओर से लड़ा तथा आदिवासी एवं नि:शुल्क (प्रो-बोनो) मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की, जो मिसाल है। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में CBI जजों, IPS अफसरों और सेना के जवानों को व्याख्यान देने वाले इस साधारण पृष्ठभूमि के असाधारण योद्धा का संदेश साफ है – “पहाड़ चाहे जितने ऊँचे हों, अगर इरादा बुलंद हो तो न्याय की राह बन ही जाती है।” इन प्रयासों से राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा मजबूत हुई है तथा कई महत्वपूर्ण निर्णयों के माध्यम से नागरिकों को न्याय मिला है, जिसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर भी देखा गया है। इस पुरस्कार से उनके योगदान को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है।
HRPC अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन 2025 में भारत सहित विश्व की चुनिन्दा हस्तियों को सम्मानित किया गया है जिन्होंने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. मनोज गोरकेला का यह सम्मान विधिक एवं मानवाधिकार जगत के लिए प्रेरणादायी है, जो दर्शाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाकर विश्व में अधिकारों की सुरक्षा को नई दिशा दी जा सकती है।
