कैदियों के अधिकारों पर HRPC की पहल, तिहाड़ जेल के पूर्व कानून अधिकारी श्री सुनील कुमार गुप्ता करेंगे संबोधित
Webinar
ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल (HRPC) द्वारा मानवाधिकार जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “जेल सुधार और कैदियों के अधिकार” विषय पर वेबिनार संख्या 201 आयोजित करने की घोषणा की गई है। यह वेबिनार दिनांक 13 फरवरी 2026, शुक्रवार को रात्रि 08:00 बजे से 09:00 बजे तक ऑनलाइन जिओमीट (JioMeet) माध्यम से आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में तिहाड़ जेल के पूर्व कानून अधिकारी एवं वर्तमान में HRPC के राष्ट्रीय विधिक सलाहकार श्री सुनील कुमार गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। वे अपने व्याख्यान में जेल सुधार की आवश्यकता, कैदियों के संवैधानिक अधिकार, तथा मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत उपलब्ध कानूनी प्रावधानों पर विस्तृत प्रकाश डालेंगे।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 एवं 21 प्रत्येक व्यक्ति को समानता, स्वतंत्रता, जीवन एवं गरिमा का अधिकार प्रदान करते हैं, जिसमें कारावास में निरुद्ध व्यक्ति भी शामिल हैं। इसके बावजूद व्यवहारिक स्तर पर अनेक बार बंदियों के अधिकारों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं। इस संदर्भ में HRPC का यह वेबिनार जागरूकता, विधिक मार्गदर्शन एवं समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
वेबिनार के दौरान अंडरट्रायल कैदियों की स्थिति, महिला एवं किशोर बंदियों के विशेष अधिकार, जेलों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की व्यवस्था, निःशुल्क कानूनी सहायता, तथा मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही, प्रतिभागियों को सुप्रीम कोर्ट एवं उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी प्रदान की जाएगी, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति सजग एवं सशक्त बन सकें।
HRPC का मानना है कि जेल सुधार केवल प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि एक मानवीय, सामाजिक एवं संवैधानिक दायित्व है। सुधारात्मक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने से न केवल बंदियों के पुनर्वास में सहायता मिलती है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होती है।
HRPC ने अधिवक्ताओं, विधि विद्यार्थियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जागरूक नागरिकों से इस वेबिनार में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान किया है, ताकि मानव गरिमा, न्याय एवं संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

