प्रसिद्ध विधि-विद्वान डॉ. मन मोहन जोशी को HRPC डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया
Awardह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल (HRPC) के अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन 2025 में भारत के प्रसिद्ध अधिवक्ता एवं विधिक शिक्षा के संस्थापक श्री मनमोहन जोशी (एमजे सर) को HRPC डॉ. भीम राव अम्बेडकर राष्ट्रीय मानवाधिकार पुरस्कार 2025 प्रदान किया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत के उस नागरिक को दिया जाता है जो विधिक क्षेत्र से जुड़ा हो, जैसे अधिवक्ता, न्यायाधीश या समकक्ष पेशेवर, और जिसने मानवाधिकारों के क्षेत्र में उत्कृष्ट भूमिका निभाई हो।
डॉ. मनमोहन जोशी एक बहुमुखी व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने B.Sc., LL.M., MBA, Ph.D. तथा साइबर लॉ और मानवाधिकार में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा हासिल किया है। हाई कोर्ट अधिवक्ता, कौटिल्य अकादमी के लीगल हेड तथा विधिक शिक्षा के संस्थापक के रूप में उन्होंने कानूनी जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एक लेखक के रूप में जनवरी 2024 तक उन्होंने 30 पुस्तकें लिखीं, जो विधि की विभिन्न शाखाओं पर आधारित हैं तथा Integrity Education Publishing House (Delhi–London) से जुड़े हैं। शोधकर्ता के रूप में उनके 29 शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विधिक जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। कीनोट स्पीकर के रूप में उन्होंने 250 से अधिक संस्थानों में कानूनी जागरूकता, महिला सशक्तिकरण, करियर मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास, तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण, आपराधिक न्याय प्रक्रिया तथा दंड संहिता जैसे विषयों पर व्याख्यान दिए हैं। यूट्यूबर के रूप में उनका प्लेटफॉर्म VidhikShiksha कानूनी शिक्षा का सबसे बड़ा डिजिटल मंच बन चुका है, जिसमें जनवरी 2024 तक 20 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स और 12 करोड़ से अधिक व्यूज हैं। ब्लॉगर के रूप में “Vidhik Diary” और “Mann Ki Diary Ke Panne” में सामाजिक एवं विधिक विचार साझा करते हैं। इन प्रयासों से विधिक शिक्षा को सुलभ बनाकर मानवाधिकारों की जागरूकता एवं संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
HRPC अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन 2025 में भारत सहित विश्व की चुनिन्दा हस्तियों को सम्मानित किया गया है जिन्होंने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। श्री मनमोहन जोशी का यह सम्मान विधिक शिक्षा एवं जागरूकता के माध्यम से मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरणादायी है, जो दर्शाता है कि डिजिटल एवं शैक्षिक पहलों से समाज में न्याय एवं अधिकारों की समझ को व्यापक बनाया जा सकता है।
