सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पर HRPC का वेबिनार संख्या–202 सफलतापूर्वक सम्पन्न
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दिनांक 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को रात्रि 08:00 बजे, Human Rights Protection Cell (HRPC) द्वारा जनहित में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 विषय पर वेबिनार संख्या–202 का सफल आयोजन JioMeet ऑनलाइन माध्यम से किया गया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्रीमती रंजना दीक्षित, प्रदेश अध्यक्षा (लीगल सेल), उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया। इस वेबिनार में सम्पूर्ण भारत से अधिवक्ताओं, विधि विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों एवं जागरूक नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने प्रश्नों के माध्यम से विषय को और अधिक व्यावहारिक एवं सारगर्भित बनाया। वेबिनार के मुख्य वक्ता माननीय सदस्य न्यायाधीश Dr. Sandeep Kumar Pandya, सदस्य, Kheda District Consumer Disputes Redressal Commission, गुजरात रहे। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल अवधारणा, आवेदन की प्रक्रिया, प्रथम एवं द्वितीय अपील की व्यवस्था, लोक सूचना अधिकारी (PIO) की जिम्मेदारियाँ, निर्धारित समय-सीमा, दंडात्मक प्रावधान तथा शासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में RTI की भूमिका पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। वेबिनार के दौरान प्रतिभागियों द्वारा अनेक महत्वपूर्ण एवं व्यवहारिक प्रश्न पूछे गए, जिनमें प्रमुख रूप से यह प्रश्न शामिल रहे कि क्या RTI आवेदन ईमेल द्वारा भेजा जा सकता है और यदि हाँ, तो शुल्क भुगतान की प्रक्रिया क्या होगी; क्या डाक द्वारा भेजे जा रहे आवेदन में 10 रुपये का शुल्क (नकद नोट) आवेदन के साथ संलग्न करना विधिसम्मत है; यदि सूचना अधिकारी निर्धारित समय-सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराते हैं तो उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही कराना, कितना उपयुक्त और वैधानिक है; क्या बिना हस्ताक्षर के भेजा गया RTI आवेदन मान्य माना जाएगा; तथा क्या RTI अधिनियम के अंतर्गत प्रधानमंत्री राहत कोष या किसी अन्य शासकीय विभाग की बैंक विवरण (डिटेल्स) प्राप्त की जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों ने यह भी जानना चाहा कि अपील की प्रक्रिया में किन बिंदुओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, तथा सूचना देने से इंकार की वैध परिस्थितियाँ कौन-सी हैं। माननीय वक्ता द्वारा इन सभी प्रश्नों का विधिक प्रावधानों एवं न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किया गया तथा प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को शासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का सशक्त साधन प्रदान करता है, किंतु इसका उपयोग विधिसम्मत प्रक्रिया एवं मर्यादाओं के अंतर्गत ही किया जाना चाहिए। Human Rights Protection Cell (HRPC) का मानना है कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र की मजबूती का आधार है, जो नागरिकों को शासन प्रणाली में सक्रिय भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार के विधिक जागरूकता कार्यक्रम समाज में संवैधानिक मूल्यों, मानवाधिकारों एवं विधि के शासन (Rule of Law) को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भविष्य में भी HRPC द्वारा जनहित में ऐसे ज्ञानवर्धक एवं सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
